August 17, 2022

परमान टाइम्स

न्यूज नेटवर्क

सेवा समायोजन की मांग पर अतिथि स.प्राध्यापक दुसरे दिन भी धरना पर डटे रहे:डॉ सतीश

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विधान परिषद के चार सदस्यों ने संयुक्त रूप से बयान जारी कर अतिथि प्राध्यापकों की मांगों का किया समर्थन

पटना ।

पटना गर्दनीबाग धरना स्थल पर बिहार राज्य के 9 विश्वविद्यालयों के कॉलेजों में कार्यरत अतिथि सहायक प्राध्यापकों के शांतिपूर्ण धरना का दूसरा दिन भी रहा ।
विधान परिषद के चार सदस्यों ने संयुक्त रूप से बयान जारी कर अतिथि प्राध्यापकों की मांगों का समर्थन किया और कहा कि अतिथि प्राध्यापकों की मांग जायज है। सरकार इनकी सेवा का सामंजन करते हुए 65 वर्ष तक की सेवा विस्तारित करे। संयुक्त बयान जारी करने वाले विधान पार्षदों में संजीव कुमार सिंह, संजय कुमार सिंह, मदन मोहन झा, संजीव श्याम सिंह थे। अतिथि प्राध्यापकों के प्रमुख मांगों का हुआ समर्थन।प्रमुख मांगे थी

  1. यूजीसी एवं राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुरूप नियुक्त अतिथि सहायक प्राध्यापक जो लगातार तीन-चार वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं, उनकी सेवा का सामंजन किया जाए।
  2. 2012 के रेसनलाइजेशन में विलुप्त किए गए स्वीकृत पदों को पुनः वापस किया जाए
  3. वर्तमान परिस्थिति में छात्रों की बढ़ती नामांकन संख्या के अनुपात में शिक्षकों का पद बढ़ाकर स्वीकृत किया जाए।
    धरना स्थल पर कोसी क्षेत्र के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी डॉ संजीव कुमार सिंह ने कहा कि विगत तीन-चार वर्षों में अतिथि प्राध्यापकों ने गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक माहौल बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाया है। कोरोनावायरस के कारण जब सारी शिक्षण संस्थाएं बंद हो गई थी, तब अतिथि प्राध्यापकों ने ऑनलाइन माध्यम से छात्रों को पढ़ाने का काम किया है।
    विधान पार्षद मदन मोहन झा ने अतिथि अध्यापकों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि
    ऑनलाइन वेबीनार एवं डिजिटल माध्यम से पठन-पाठन कर अतिथि प्राध्यापकों ने शिक्षा के क्षेत्र में मिसाल पेश किया है। शिक्षा के क्षेत्र में इन अध्यापकों ने जो अलख जगाने का काम किया है, इसको भुलाया नहीं जा सकता। वर्तमान में छात्रों के सकल नामांकन अनुपात में काफी वृद्धि हुई है। इस अनुपात को देखते हुए सरकार को शिक्षकों के स्वीकृत पदों की संख्या बढ़ानी चाहिए। सरकार इनकी सेवा को जल्द से जल्द सामंजन करें ताकि इनके अंदर से असुरक्षा का भाव खत्म हो सके।
    तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी प्रो संजय कुमार सिंह ने कहा कि अतिथि प्राध्यापकों की मांगे बिल्कुल जायज है। इनकी नियुक्ति यूजीसी के मापदंडों पर विधिवत हुई है। विगत तीन-चार वर्षों में इन्होंने लड़खड़ाती हुई उच्च शिक्षा को संभालने का काम किया है। अतिथि प्राध्यापक उच्च शिक्षा के मजबूत मेरुदंड हैं। अतः सरकार मानवीयता के आधार पर इनकी सेवा का समंजन करें ताकि इन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त हो सके और इनके अंदर से असुरक्षा की भावना खत्म हो सके।
    सारण निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी प्रो वीरेंद्र नारायण यादव ने कहा कि विगत तीन-चार वर्षों में अतिथि प्राध्यापकों ने क्वालिटी एजुकेशन देकर मिसाल पेश किया है। इनकी मांगे बिल्कुल जायज है।विधान पार्षद अजय कुमार सिंह एवं विधायक अली असरफ सिद्दीकी तथा रणविजय साहू ने भी अतिथि सहायक प्राध्यापकों के सेवा समायोजन की मांग को जायज कहा।
    दूसरी तरफ आज विधान सभा में भी अतिथि स.प्राध्यापकों की मांग को नीतश मिश्रा ने उठाया लेकिन वह हंगामें की भेंट चढ़ गया।धरना में सभी विश्वविद्यालयों के लगभग 200 अतिथि प्राध्यापकों ने भाग लिया।धरने में लगभग 100 महिला अतिथि प्राध्यापकों ने भी भाग लिया।मौके पर सभी विश्वविद्यालय के अध्यक्षगण संयोजक डॉ सतीश कुमार दास के नेतृत्व में उपस्थित रहे, जिसमें डॉ मुकेश प्रसाद निराला, डॉ ललित किशोर, डॉ अनिल कुमार , डॉ धर्मेंद्र कुमार सिंह, , डॉ आनंद आजाद, डॉ शैलेंद्र ठाकुर, डॉ आदित्य कुमार आनंद एवं डॉ विद्यानंद विधाता मौजूद रहे। इसके साथ ही डॉ. रूद्र किंकर वर्मा,डॉ दीपक कुमार,डॉ लवली सिंह, डॉ नीतेश कुमार, एल एन एम यू से डॉ बच्चा रजक, डॉ आमोद प्रमोधी, समेत विभिन्न विश्वविद्यालयों के महिला प्रतिनिधि एवं कई पदाधिकारी गण मौजूद रहे।
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