मंत्री करे बाप रे बाप,अफसर नहीं सुने कोई बात।

मंत्री करे बाप रे बाप!
अफसर नहीं सुने कोई बात।
कैसी है सुशासन की सरकार
कुर्सी के लिए करे हरदम खुराफत।
मंत्री करे बाप रे बाप!
जनक राम हो या श्याम रजक
मांझी हो या मदन सहनी
कोई नहीं है बाकी
सबकी हुई मान हानि।
सब घुटते हैं दिन रात।
मंत्री करे बाप रे बाप!
कई छोड़ के भागे मंत्रिमंडल
कई थामे हैं कमण्डल।
कौन किस से कब कर दे घात।
मंत्री करे बाप रे बाप।
जनता अब बेसुध हुई
होश हवाश सब खोई
अफसर ने ऐसा चलाया बज्रपात।
मंत्री करे बाप रे बाप!
डबल इंजन की सरकार
डबल मखन ब्रेड की जुगाड़
सरकार ऊगाहे अफसर से
अफसर ऊगाहे जनता से
फिर क्यों न जनता मारे ऐसे को लात!
मंत्री करे बाप रे बाप!
प्रसिद्ध यादव।

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