31 जनवरी तक टीबी के मरीजों की खोज के लिए चलाया जा रहा है विशेष अभियान – जनवरी माह में अब तक यक्ष्मा के मिले हैं 22 मरीज – नए मरीजों की खोज के लिए चलाया जा रहा अभियान – जिला स्वास्थ्य समिति ने निजी अस्पतालों के संचालकों के लिए जारी किए निर्देश

शेयर करें

बक्सर, 13 जनवरी | कोरोना काल से सबक लेकर राज्य सरकार व स्वास्थ्य समिति ने टीबी मरीजों के उपचार के साथ उनकी जल्द से जल्द और सटीक स्टीक पहचान पर जोर दिया है। इसके लिए वर्ष 2021 के लिए रूप रेखा तैयार कर उसपर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। जिसके तहत टीबी (ट्यूबरक्लोसिस/यक्ष्मा) के नए मरीजों की खोज व उनके इलाज के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं। वर्ष 2020 में जिले में कुल 1007 मरीजों की पहचान कर उनका इलाज शुरू किया गया था। लेकिन, मार्च में लॉक डाउन लगने से नए मरीजों की खोज थोड़ी धीमी हो गई थी। जिसकी क्षति पूर्ति के लिए अब जिला स्वास्थ्य समिति पूरी तरह से तत्पर है। फिलवक्त ‘टीबी हारेगा देश जीतेगा’ अभियान के तहत अभियान चलाया जा रहा है। जिसके तहत सघन टीबी रोगी खोज (एक्टिव केस फाइंडिंग) अभियान चलाया जा रहा है|.
नए मरीजों की पहचान के लिए कई स्तर पर चल रहा है अभियान :
संचारी रोग के नोडल पदाधिकारी डॉ. नरेश कुमार ने में बताया जनवरी माह से इस अभियान में तेजी लाया ई जा रहा ही है। जिले में कई अभियान शुरू किए गए हैं। जिसमें चार जनवरी से एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान के तहत कार्यक्रम निर्धारित किये गए हैं । साथ ही, जिला गैर संचारी पदाधिकारी से डायबिबटीज के मरीजों की जानकारी मांगी गई है ताकि, डायबटीज के मरीजों में टीबी के लक्षणों की खोज की जा सके। 11 से 16 जनवरी तक मंडल कारा, महिला मंडल कारा, ओपेन जेल, बाल गृह, महिला अल्पावास गृह और अन्य स्थानों पर टीबी के मरीजों की खोज के लिए जांच शिविर लगाए जाएंगे। नए साल में अब तक जिले के विभिन्न इलाकों से 22 नए मरीज मिले हैं। जिनमें सबसे अधिक बक्सर से 13 लोगों की पहचान की गयी है। साथ ही, सभी मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया है।
निश्चय पोर्टल पर टीबी की मरीजों का निबंधन करेंगे निजी अस्पताल के संचालक :
डॉ. नरेश कुमार ने बताया 18 जनवरी से लेकर 23 जनवरी तक निजी अस्पतालों का के निरीक्षण किया जाएगा जिसमें टीबी का इलाज कराने के लिए आने वाले मरीजों की खोज की जाएगी। इस क्रम में निजी अस्पतालों के संचालकों को निर्देशित किया जाएगा कि किसी भी मरीज में टीबी के लक्षण दिखने पर तत्काल उसकी सूचना विभाग को दी जाए। साथ ही, उन मरीजों का डाटा निश्चय पोर्टल पोर्टल पर दिया किया जाए। रोगी की पहचान करने के लिए उक्त संस्थान को 500 रुपये दिए जाएंगे। साथ ही, पोर्टल पर मरीज का निबंधन होने के बाद उसके खाते में डीबीटी के माध्यम से 500 रुपये भेजे जाएंगे। तत्पश्चात 27 से 31 जनवरी तक आशा कार्यकर्ताएं डोर टू डोर जाकर अपने क्षेत्र अंतर्गत लोगों में टीबी के लक्षणों की पहचान करेंगी।
माइक्रो प्लान के आधार पर होगी मरीजों की खोज :
डॉ. नरेश कुमार ने बताया जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के संचालकों को माइक्रो प्लान भेजने के निर्देश दिया गया है। जिसके तहत नए मरीजों की खोज और उनकी पहचान की जानी है। माइक्रो प्लान के अनुसार शहरी दलित मलिन बस्तियां, ईंट भट्टों पर काम करने वाले मजदूर, नव निर्मित कार्य स्थलों के मजदूर, ग्रामीण दूदुरस्थ एवं कठिन क्षेत्र तथा महादलित टोलों में लक्षित समूह में टीबी के रोगियों की पहचान की जायेगी सके। उन्होंने कहा कि यदि टीम के लोग किसी के घर पहुंचे तो टीबी के लक्षण वाले व्यक्ति अपने रोग को छिपाएं नहीं, बल्कि लक्षणों के बारे में खुलकर बताएं। टीबी रोग की पुष्टि होने पर उनका समुचित इलाज होगा। साथ ही, टीबी रोगी के बारे में सूचना देने वाले व्यक्ति गैर वेतनभोगी को 500 रुपये प्रोत्साहन स्वरूप दिए जाएंगे। इलाज के दौरान रोगी को भी प्रतिमाह 500 रुपये दिए जाएंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन